Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.55: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! श्रीकृष्ण को आते देख कुन्तीदेवी दुःखी और प्रसन्न हो गईं तथा अपने ऊपर आए हुए नाना प्रकार के दुःखों का वर्णन करने लगीं-॥55॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
सा शोकार्ता च हृष्टा च दृष्ट्वा गोविन्दमागतम्।
नानाविधानि दु:खानि सर्वाण्येवान्वकीर्तयत्॥ ५५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! श्रीकृष्ण को आते देख कुन्तीदेवी दुःखी और प्रसन्न हो गईं तथा अपने ऊपर आए हुए नाना प्रकार के दुःखों का वर्णन करने लगीं-॥55॥
Vaishampayanji says – Janamejaya! Seeing the arrival of Shri Krishna, Kuntidevi became sad and happy and started narrating all the various types of sorrows that had come upon her -॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥