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mahabharat 5.90.54: श्री कृष्ण! महात्मा विदुर का परम बुद्धिमान् एवं गम्भीर स्वभाव ही वह आभूषण है, जो सम्पूर्ण लोकों में विद्यमान (प्रसिद्ध) है॥54॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.90.54 
तस्य कृष्ण महाबुद्धेर्गम्भीरस्य महात्मन:।
क्षत्तु: शीलमलंकारो लोकान् विष्टभ्य तिष्ठति॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! महात्मा विदुर का परम बुद्धिमान् एवं गम्भीर स्वभाव ही वह आभूषण है, जो सम्पूर्ण लोकों में विद्यमान (प्रसिद्ध) है॥54॥
 
Sri Krishna! The most intelligent and serious nature of Mahatma Vidur's modesty is the ornament, which is present in all the worlds (famous)'. 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)