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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.90.47 
चतुर्दशमिदं वर्षं यन्नापश्यमरिंदम।
पुत्रादिभि: परिद्यूनां द्रौपदीं सत्यवादिनीम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुनाश! चौदह वर्ष हो गए हैं। इतने दिनों से मैंने पुत्रों के वियोग से दुःखी सत्यव्रती द्रौपदी को नहीं देखा।
 
O enemy-destroyer! It has been fourteen years now. For so many days I have not seen the truthful Draupadi who is distressed by the separation from her sons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)