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mahabharat 5.90.45: अच्युत! मैंने उसे सब प्रकार से सम्मानित किया है, वह अत्यंत श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुई शुभ रानी द्रौपदी इन दिनों कैसी है?॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.90.45 
महाभिजनसम्पन्ना सर्वकामै: सुपूजिता।
ईश्वरी सर्वकल्याणी द्रौपदी कथमच्युत॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! मैंने उसे सब प्रकार से सम्मानित किया है, वह अत्यंत श्रेष्ठ कुल में उत्पन्न हुई शुभ रानी द्रौपदी इन दिनों कैसी है?॥ 45॥
 
Achyuta! I have honored her with all kinds of things, how is that auspicious Queen Draupadi, born in a very illustrious family, these days?॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)