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mahabharat 5.90.44: सत्यव्रती द्रौपदी, जो अपने पति के लोक को अपने पुत्रों के लोक से श्रेष्ठ मानती थी, अपने प्रिय पुत्रों को भी त्यागकर पाण्डवों का अनुसरण करती है।   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.90.44 
पुत्रलोकात् पतिलोकं वृण्वाना सत्यवादिनी।
प्रियान् पुत्रान् परित्यज्य पाण्डवाननुरुध्यते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
सत्यव्रती द्रौपदी, जो अपने पति के लोक को अपने पुत्रों के लोक से श्रेष्ठ मानती थी, अपने प्रिय पुत्रों को भी त्यागकर पाण्डवों का अनुसरण करती है।
 
The truthful Draupadi, who considered the world of her husband to be superior to the world of her sons, abandons even her beloved sons and follows the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)