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mahabharat 5.90.41: महाबाहो! क्या मैं उस सौम्य योद्धा नकुल को फिर कभी देख सकूँगा, जो सुख भोगने में समर्थ है, परन्तु दुःख सहने में असमर्थ है?॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.90.41 
सुखोचितमदु:खार्हं सुकुमारं महारथम्।
अपि जातु महाबाहो पश्येयं नकुलं पुन:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! क्या मैं उस सौम्य योद्धा नकुल को फिर कभी देख सकूँगा, जो सुख भोगने में समर्थ है, परन्तु दुःख सहने में असमर्थ है?॥ 41॥
 
Mahabaho! Will I ever again be able to see the gentle warrior Nakula, who is capable of enjoying pleasures but incapable of suffering pain?॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)