Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.39-40: श्री कृष्ण! जो सुकुमार, तरुण, वीरता से युक्त और सुन्दर है, जो सब भाइयों से बाहर विचरण करने वाला प्राणों का प्रिय स्वरूप है, जिसमें युद्ध की विचित्र कला दिखाई देती है, वह महाधनुर्धर, पराक्रमी और मुझसे उत्पन्न हुआ मेरा पुत्र पाण्डु नन्दन नकुल सुरक्षित है न? 39-40॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुकुमारो युवा शूरो दर्शनीयश्च पाण्डव:।
भ्रातॄणां चैव सर्वेषां प्रिय: प्राणो बहिश्चर:॥ ३९॥
चित्रयोधी च नकुलो महेष्वासो महाबल:।
कच्चित् सकुशली कृष्ण वत्सो मम सुखैधित:॥ ४०॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! जो सुकुमार, तरुण, वीरता से युक्त और सुन्दर है, जो सब भाइयों से बाहर विचरण करने वाला प्राणों का प्रिय स्वरूप है, जिसमें युद्ध की विचित्र कला दिखाई देती है, वह महाधनुर्धर, पराक्रमी और मुझसे उत्पन्न हुआ मेरा पुत्र पाण्डु नन्दन नकुल सुरक्षित है न? 39-40॥
Sri Krishna! He who is delicate, young, full of bravery and beautiful, who is the beloved form of life roaming outside all the brothers, in whom the strange art of war can be seen, that great archer, mighty and my son Pandu Nandan Nakul, born from me, is safe, isn't it? 39-40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥