Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.35-38: मधुसूदन श्रीकृष्ण! जो सम्पूर्ण प्राणियों पर दया करने वाले, विनयशील, शस्त्रविद्या में निपुण, सौम्य, कोमल, धार्मिक और मुझे अत्यन्त प्रिय हैं; जो महान धनुर्धर और युद्धभूमि में शोभा पाने वाले पराक्रमी योद्धा हैं, जो समस्त भाइयों के सेवक हैं, जो धर्म और अर्थ की चर्चा में कुशल हैं और जो पूर्ण यौवन से युक्त हैं; जो शुभ आचरण वाले महापुरुष हैं और जिनके आचरण की प्रशंसा समस्त भाई करते हैं, जो अपने बड़े भाई से स्नेह करते हैं, जो युद्ध में अग्रणी हैं और जो सदैव मेरी सेवा में तत्पर रहते हैं; उन वीर माद्रीपुत्र सहदेव के विषय में मुझे बताइए॥ 35-38॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मधुसूदन श्रीकृष्ण! जो सम्पूर्ण प्राणियों पर दया करने वाले, विनयशील, शस्त्रविद्या में निपुण, सौम्य, कोमल, धार्मिक और मुझे अत्यन्त प्रिय हैं; जो महान धनुर्धर और युद्धभूमि में शोभा पाने वाले पराक्रमी योद्धा हैं, जो समस्त भाइयों के सेवक हैं, जो धर्म और अर्थ की चर्चा में कुशल हैं और जो पूर्ण यौवन से युक्त हैं; जो शुभ आचरण वाले महापुरुष हैं और जिनके आचरण की प्रशंसा समस्त भाई करते हैं, जो अपने बड़े भाई से स्नेह करते हैं, जो युद्ध में अग्रणी हैं और जो सदैव मेरी सेवा में तत्पर रहते हैं; उन वीर माद्रीपुत्र सहदेव के विषय में मुझे बताइए॥ 35-38॥
Madhusudana Sri Krishna! Who is kind to all beings, modest, great expert in weapons, gentle, tender, religious and very dear to me; who is a great archer and valiant warrior who looks good on the battlefield, who is the servant of all the brothers, who is skilled in the discussions of Dharma and Artha and who is full of youth; who is a great man with auspicious conduct and whose conduct is praised by all the brothers, who is fond of his elder brother, who is the leader in battles and who is always ready to serve me; tell me about that brave Sahadev, the son of Madri.॥ 35-38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥