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mahabharat 5.90.3: बहुत समय के बाद कुन्तीदेवी अपने बलवान पुत्रों के बीच निवास करने वाले तथा उनके साथ विहार करने वाले वृष्णिकुलनन्दन गोविन्द को देखकर आँसू बहाने लगीं॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.90.3 
तेषां सत्त्ववतां मध्ये गोविन्दं सहचारिणम्।
चिरस्य दृष्ट्वा वार्ष्णेयं बाष्पमाहारयत् पृथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
बहुत समय के बाद कुन्तीदेवी अपने बलवान पुत्रों के बीच निवास करने वाले तथा उनके साथ विहार करने वाले वृष्णिकुलनन्दन गोविन्द को देखकर आँसू बहाने लगीं॥3॥
 
After a long time, Kuntidevi started shedding tears after seeing Vrishnikulnandan Govinda, who lived among her powerful sons and wandered with them. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)