Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.28-34: ‘श्रीकृष्ण! जो अर्जुन दो भुजाओं वाला होकर भी प्राचीन काल के सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन के साथ सदैव मुकाबला करता है; केशव! जो पाँच सौ बाणों को समान वेग से चलाता है, वह पाण्डव अर्जुन धनुर्विद्या में राजा कार्तवीर्य के समान माना जाता है, जिसका तेज सूर्य के समान है, जो संयम में महर्षियों के समान है, क्षमा में पृथ्वी के समान है और पराक्रम में देवराज इन्द्र के समान है; मधुसूदन! कौरवों का यह विशाल साम्राज्य, जो समस्त राजाओं में विख्यात एवं यशस्वी है, जिसे अर्जुन ने अपने पराक्रम से विस्तृत किया है; जिसके बाहुबल पर समस्त पाण्डव आश्रित हैं; जो समस्त रथियों में श्रेष्ठ तथा सत्यनिष्ठ एवं पराक्रमी है, उसके विरुद्ध युद्ध में जाने पर कोई भी जीवित नहीं लौटता; हे अच्युत! जो समस्त प्राणियों को परास्त करने में समर्थ है, विजयी एवं अजेय है तथा जो समस्त पाण्डवों का आधार है; जैसे इन्द्र देवताओं का आधार है, उसी प्रकार इस समय आपके भाई एवं मित्र अर्जुन का क्या हाल है? 28–34. | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘श्रीकृष्ण! जो अर्जुन दो भुजाओं वाला होकर भी प्राचीन काल के सहस्त्रबाहु कार्तवीर्य अर्जुन के साथ सदैव मुकाबला करता है; केशव! जो पाँच सौ बाणों को समान वेग से चलाता है, वह पाण्डव अर्जुन धनुर्विद्या में राजा कार्तवीर्य के समान माना जाता है, जिसका तेज सूर्य के समान है, जो संयम में महर्षियों के समान है, क्षमा में पृथ्वी के समान है और पराक्रम में देवराज इन्द्र के समान है; मधुसूदन! कौरवों का यह विशाल साम्राज्य, जो समस्त राजाओं में विख्यात एवं यशस्वी है, जिसे अर्जुन ने अपने पराक्रम से विस्तृत किया है; जिसके बाहुबल पर समस्त पाण्डव आश्रित हैं; जो समस्त रथियों में श्रेष्ठ तथा सत्यनिष्ठ एवं पराक्रमी है, उसके विरुद्ध युद्ध में जाने पर कोई भी जीवित नहीं लौटता; हे अच्युत! जो समस्त प्राणियों को परास्त करने में समर्थ है, विजयी एवं अजेय है तथा जो समस्त पाण्डवों का आधार है; जैसे इन्द्र देवताओं का आधार है, उसी प्रकार इस समय आपके भाई एवं मित्र अर्जुन का क्या हाल है? 28–34.
‘Sri Krishna! Arjuna, who despite having two arms, always competes with the thousand-armed Kartavirya Arjuna of ancient times; Keshav! Who shoots five hundred arrows with the same speed, the Pandava Arjuna, who is considered equal to King Kartavirya in archery, whose brilliance is like the Sun, who is equal to the great sages in self-control, equal to the Earth in forgiveness and equal to the king of gods Indra in valour; Madhusudan! This vast empire of the Kauravas, which is famous and famous among all the kings, which has been expanded by Arjuna with his valour; all the Pandavas rely on his arm strength; who is the best among all charioteers and is truthful and valiant, no one returns alive after going against him in a battle, Achyuta! Who is capable of defeating all creatures, victorious and invincible and who is the support of all the Pandavas just as Indra is the support of the gods, in the same way, how is your brother and friend Arjun at this time? 28–34.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥