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mahabharat 5.90.2: शुद्ध सूर्य के समान तेजस्वी श्रीकृष्ण को आते देख, कुन्तीदेवी ने उन्हें हृदय से लगा लिया और अपने पुत्रों का स्मरण करके अत्यन्त विलाप करने लगीं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.90.2 
सा दृष्ट्वा कृष्णमायान्तं प्रसन्नादित्यवर्चसम्।
कण्ठे गृहीत्वा प्राक्रोशत् स्मरन्ती तनयान् पृथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध सूर्य के समान तेजस्वी श्रीकृष्ण को आते देख, कुन्तीदेवी ने उन्हें हृदय से लगा लिया और अपने पुत्रों का स्मरण करके अत्यन्त विलाप करने लगीं॥2॥
 
Seeing Sri Krishna coming, who was as radiant as the pure Sun, Kunti Devi embraced him and began to cry profusely, remembering her sons.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)