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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  5.90.105 
वैशम्पायन उवाच
तामामन्त्र्य च गोविन्द: कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम्।
प्रातिष्ठत महाबाहुर्दुर्योधनगृहान् प्रति॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'हे जनमेजय! तत्पश्चात् बलवान गोविन्द ने कुन्तीदेवी की प्रदक्षिणा करके और उनकी अनुमति लेकर दुर्योधन के भवन की ओर प्रस्थान किया।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Thereafter, the powerful Govinda, after circumambulating Kuntidevi and taking her permission, proceeded towards Duryodhan's house.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कृष्णकुन्तीसंवादे नवतितमोऽध्याय:॥ ९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्ण-कुन्ती-संवादविषयक नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९०॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १०६ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)