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mahabharat 5.90.103-104: मैं प्रत्येक कार्य के संचालन में, मित्रों के संग्रह में, बुद्धि और पराक्रम में आपके अद्भुत प्रभाव से परिचित हूँ। हमारे कुल में आप ही धर्म हैं, आप ही सत्य हैं, आप ही महान तप हैं, आप ही रक्षक हैं और आप ही परमेश्वर हैं। सब कुछ आपमें ही प्रतिष्ठित है। आप जो कुछ भी कहते हैं, वह आपके समक्ष सदैव सत्य ही होगा।॥103-104॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 103-104
 
 
श्लोक  5.90.103-104 
व्यवस्थायां च मित्रेषु बुद्धिविक्रमयोस्तथा।
त्वमेव न: कुले धर्मस्त्वं सत्यं त्वं तपो महत्॥ १०३॥
त्वं त्राता त्वं महद् ब्रह्म त्वयि सर्वं प्रतिष्ठितम्।
यथैवात्थ तथैवैतत् त्वयि सत्यं भविष्यति॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
मैं प्रत्येक कार्य के संचालन में, मित्रों के संग्रह में, बुद्धि और पराक्रम में आपके अद्भुत प्रभाव से परिचित हूँ। हमारे कुल में आप ही धर्म हैं, आप ही सत्य हैं, आप ही महान तप हैं, आप ही रक्षक हैं और आप ही परमेश्वर हैं। सब कुछ आपमें ही प्रतिष्ठित है। आप जो कुछ भी कहते हैं, वह आपके समक्ष सदैव सत्य ही होगा।॥103-104॥
 
I am aware of your amazing influence in the management of every work, in the collection of friends, in wisdom and valour. In our clan, you are the religion, you are the truth, you are the great penance, you are the protector and you are the Supreme God. Everything is established in you. Whatever you say, it will always be true in your presence.॥ 103-104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)