Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.90.102: हे परंतप श्रीकृष्ण! आपको धर्म का परित्याग किए बिना, छल-कपट से दूर रहकर, उचित समय पर उचित कार्य करना चाहिए। मैं आपकी सत्यनिष्ठा और आपके कुल की मर्यादा की शक्ति को जानता हूँ॥ 102॥ | mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अविलोपेन धर्मस्य अनिकृत्या परंतप।
प्रभावज्ञास्मि ते कृष्ण सत्यस्याभिजनस्य च॥ १०२॥
अनुवाद
हे परंतप श्रीकृष्ण! आपको धर्म का परित्याग किए बिना, छल-कपट से दूर रहकर, उचित समय पर उचित कार्य करना चाहिए। मैं आपकी सत्यनिष्ठा और आपके कुल की मर्यादा की शक्ति को जानता हूँ॥ 102॥
O Parantapa Sri Krishna! You should do the right thing at the right time without abandoning Dharma and staying away from deceit and fraud. I know the power of your truthfulness and your family's honour.॥ 102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥