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mahabharat 5.90.101: कुन्ती बोलीं - "हे महाबाहु मधुसूदन श्रीकृष्ण! पाण्डवों के लिए जो हितकर हो, जो कार्य आप उचित समझें, वही कीजिए।" ॥101॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  5.90.101 
कुन्त्युवाच
यद् यत् तेषां महाबाहो पथ्यं स्यान्मधुसूदन।
यथा यथा त्वं मन्येथा: कुर्या: कृष्ण तथा तथा॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोलीं - "हे महाबाहु मधुसूदन श्रीकृष्ण! पाण्डवों के लिए जो हितकर हो, जो कार्य आप उचित समझें, वही कीजिए।" ॥101॥
 
Kunti said, "O mighty-armed Madhusudan Sri Krishna! Do whatever is beneficial for the Pandavas and whatever task you deem fit." ॥101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)