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mahabharat 5.90.100: यह आश्वासन पाकर अपने पुत्रों से अलग लेटी हुई कुन्तीदेवी ने अज्ञानजनित मोह का प्रतिरोध करके भगवान जनार्दन से कहा ॥100॥   |   mahabharat अध्याय 5.90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 90: श्रीकृष्णका कुन्तीके समीप जाना एवं युधिष्ठिरका कुशल-समाचार पूछकर अपने दु:खोंका स्मरण करके विलाप करती हुई कुन्तीको आश्वासन देना  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  5.90.100 
एवमाश्वासिता कुन्ती प्रत्युवाच जनार्दनम्।
पुत्रादिभिरभिध्वस्ता निगृह्याबुद्धिजं तम:॥ १००॥
 
 
अनुवाद
यह आश्वासन पाकर अपने पुत्रों से अलग लेटी हुई कुन्तीदेवी ने अज्ञानजनित मोह का प्रतिरोध करके भगवान जनार्दन से कहा ॥100॥
 
After getting this assurance, Kuntidevi, who was lying away from her sons, resisted the attachment born of ignorance and said to Lord Janardan. 100॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)