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mahabharat 5.9.58-59: भरत! त्वष्टा के तेज से मोहित होकर सभी देवता देवराज इन्द्र तथा ऋषियों के साथ एकत्र हुए और विचार-विमर्श करने लगे कि अब क्या करना चाहिए। हे राजन! भय से मोहित होकर सभी देवता बहुत विचार-विमर्श के बाद मौन होकर अविनाशी परब्रह्म भगवान विष्णु की शरण में गए और वृत्रासुर को मारने की इच्छा से मंदर पर्वत के शिखर पर ध्यान में बैठ गए। 58-59।   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 58-59
 
 
श्लोक  5.9.58-59 
समेत्य सह शक्रेण त्वष्टुस्तेजोविमोहिता:।
आमन्त्रयन्त ते सर्वे मुनिभि: सह भारत॥ ५८॥
किं कार्यमिति वै राजन् विचिन्त्य भयमोहिता:।
जग्मु: सर्वे महात्मानं मनोभिर्विष्णुमव्ययम्।
उपविष्टा मन्दराग्रॺे सर्वे वृत्रवधेप्सव:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भरत! त्वष्टा के तेज से मोहित होकर सभी देवता देवराज इन्द्र तथा ऋषियों के साथ एकत्र हुए और विचार-विमर्श करने लगे कि अब क्या करना चाहिए। हे राजन! भय से मोहित होकर सभी देवता बहुत विचार-विमर्श के बाद मौन होकर अविनाशी परब्रह्म भगवान विष्णु की शरण में गए और वृत्रासुर को मारने की इच्छा से मंदर पर्वत के शिखर पर ध्यान में बैठ गए। 58-59।
 
Bharata! Fascinated by the brilliance of Tvashta, all the gods met with Devraja Indra and the sages and began to discuss what they should do now. O King! Fascinated by fear, all the gods after much deliberation, silently sought refuge in the immortal Supreme Being Lord Vishnu and with the desire to kill Vritrasura, sat down in meditation on the peak of Mandara mountain. 58-59.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्रविजये नवमोऽध्याय:॥ ९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्रविजयविषयक नौवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके ६ श्लोक मिलाकर कुल ६५ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)