Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.9.53-54: तब उन महाबलशाली देवताओं ने वृत्रासुर का नाश करने के लिए जम्भाई उत्पन्न की। जब वृत्रासुर ने जम्भाई लेते हुए अपना मुख खोला, तब बल का नाश करने वाले इन्द्र अपने अंग समेटकर बाहर आ गए। तभी से जृम्भशक्ति समस्त लोगों के प्राणों में निवास करने लगी ॥53-54॥ | mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब उन महाबलशाली देवताओं ने वृत्रासुर का नाश करने के लिए जम्भाई उत्पन्न की। जब वृत्रासुर ने जम्भाई लेते हुए अपना मुख खोला, तब बल का नाश करने वाले इन्द्र अपने अंग समेटकर बाहर आ गए। तभी से जृम्भशक्ति समस्त लोगों के प्राणों में निवास करने लगी ॥53-54॥
Then those great gods with great power created the yawn which was to destroy Vritraasura. When Vritraasura opened his mouth while yawning, Indra, the destroyer of strength, came out withdrawing his limbs. From then on, Jrimbhashakti started residing in the lives of all people. ॥ 53-54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥