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mahabharat 5.9.49: ऐसा कहते ही सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी वृत्रासुर बहुत बड़ा हो गया और उसने सम्पूर्ण आकाश को ढक लिया। वह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रलयकाल का सूर्य उदय हुआ हो। उसने पूछा - 'पिताजी! मैं क्या करूँ?'॥49॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.9.49 
सोऽवर्धत दिवं स्तब्ध्वा सूर्यवैश्वानरोपम:।
किं करोमीति चोवाच कालसूर्य इवोदित:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहते ही सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी वृत्रासुर बहुत बड़ा हो गया और उसने सम्पूर्ण आकाश को ढक लिया। वह ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो प्रलयकाल का सूर्य उदय हुआ हो। उसने पूछा - 'पिताजी! मैं क्या करूँ?'॥49॥
 
As soon as he said this, Vritraasura, who was as radiant as the sun and fire, became very big and covered the entire sky. He looked as if the sun had risen at the time of doomsday. He asked - 'Father! What should I do?'॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)