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mahabharat 5.9.46: अतः मैं देवेन्द्र का नाश करने के लिए वृत्रासुर को भी उत्पन्न करूँगा। आज संसार के लोग मेरा पराक्रम और मेरी तपस्या का महान पराक्रम देखें ॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.9.46 
तस्माच्छक्रविनाशाय वृत्रमुत्पादयाम्यहम्।
लोका: पश्यन्तु मे वीर्यं तपसश्च बलं महत्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
अतः मैं देवेन्द्र का नाश करने के लिए वृत्रासुर को भी उत्पन्न करूँगा। आज संसार के लोग मेरा पराक्रम और मेरी तपस्या का महान पराक्रम देखें ॥ 46॥
 
Therefore, I will also create Vritraasura to destroy Devendra. Today, the people of the world should see my prowess and the great power of my penance. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)