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mahabharat 5.9.44-45h: दैत्यों का संहार करने वाले इन्द्र ने अपने शत्रु का वध करके अपने को धन्य समझा। जब त्वष्टा प्रजापति ने सुना कि इन्द्र ने उनके पुत्र को मार डाला है, तो क्रोध से उनकी आँखें लाल हो गईं और वे इस प्रकार बोले।   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  5.9.44-45h 
मेने कृतार्थमात्मानं हत्वा शत्रुं सुरारिहा।
त्वष्टा प्रजापति: श्रुत्वा शक्रेणाथ हतं सुतम्॥ ४४॥
क्रोधसंरक्तनयन इदं वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
दैत्यों का संहार करने वाले इन्द्र ने अपने शत्रु का वध करके अपने को धन्य समझा। जब त्वष्टा प्रजापति ने सुना कि इन्द्र ने उनके पुत्र को मार डाला है, तो क्रोध से उनकी आँखें लाल हो गईं और वे इस प्रकार बोले।
 
Indra, the slayer of demons, considered himself blessed after killing his enemy. When Tvashta Prajapati heard that Indra had killed his son, his eyes turned red with anger and he spoke thus. 44 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)