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mahabharat 5.9.37: तामसिक यज्ञों में, जहाँ लोग हिंसा करते हैं, वे तुम्हें एक पशु का सिर देंगे। बढ़ई! यह मेरा तुम्हें आशीर्वाद है। अब तुम शीघ्रता से मेरा प्रिय कार्य पूरा करो। 37।   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.37 
शिर: पशोस्ते दास्यन्ति भागं यज्ञेषु मानवा:।
एष तेऽनुग्रहस्तक्षन् क्षिप्रं कुरु मम प्रियम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तामसिक यज्ञों में, जहाँ लोग हिंसा करते हैं, वे तुम्हें एक पशु का सिर देंगे। बढ़ई! यह मेरा तुम्हें आशीर्वाद है। अब तुम शीघ्रता से मेरा प्रिय कार्य पूरा करो। 37।
 
In the Tamasic yajnas where people indulge in violence, they will give you the head of an animal as your share. Carpenter! This is my blessing on you. Now you quickly complete my favourite task. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)