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mahabharat 5.9.36: बढ़ई! हालाँकि वह मारा जा चुका है, फिर भी मुझे उससे डर लग रहा है। तुम जल्दी से उसका सिर टुकड़े-टुकड़े कर दो। मैं तुम पर मेहरबान रहूँगा।   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.36 
अद्यापि चाहमुद्विग्नस्तक्षन्नस्माद् बिभेमि वै।
क्षिप्रं छिन्धि शिरांसि त्वं करिष्येऽनुग्रहं तव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
बढ़ई! हालाँकि वह मारा जा चुका है, फिर भी मुझे उससे डर लग रहा है। तुम जल्दी से उसका सिर टुकड़े-टुकड़े कर दो। मैं तुम पर मेहरबान रहूँगा।
 
Carpenter! Although he has been killed, I am still afraid of him. You quickly break his head into pieces. I will be gracious to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)