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तक्षोवाच
क्रूरेण नापत्रपसे कथं शक्रेह कर्मणा।
ऋषिपुत्रमिमं हत्वा ब्रह्महत्याभयं न ते॥ ३४॥
अनुवाद
बढ़ई बोला- हे देवराज! इस क्रूर कर्म से आपको लज्जा क्यों न आए? क्या आपको इस ऋषिपुत्र को मारकर लगने वाले ब्रह्महत्या के पाप का भय नहीं है?॥ 34॥
The carpenter said— O King of the Gods! How can you not be ashamed of this cruel deed? Are you not afraid of the sin of killing a brahmin that you will incur by killing this son of the sage?॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥