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mahabharat 5.9.34: बढ़ई बोला- हे देवराज! इस क्रूर कर्म से आपको लज्जा क्यों न आए? क्या आपको इस ऋषिपुत्र को मारकर लगने वाले ब्रह्महत्या के पाप का भय नहीं है?॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.34 
तक्षोवाच
क्रूरेण नापत्रपसे कथं शक्रेह कर्मणा।
ऋषिपुत्रमिमं हत्वा ब्रह्महत्याभयं न ते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
बढ़ई बोला- हे देवराज! इस क्रूर कर्म से आपको लज्जा क्यों न आए? क्या आपको इस ऋषिपुत्र को मारकर लगने वाले ब्रह्महत्या के पाप का भय नहीं है?॥ 34॥
 
The carpenter said— O King of the Gods! How can you not be ashamed of this cruel deed? Are you not afraid of the sin of killing a brahmin that you will incur by killing this son of the sage?॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)