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mahabharat 5.9.33: इन्द्र ने कहा- बढ़ई! तुम्हें मालूम होना चाहिए कि मैं देवराज इन्द्र हूँ। मैंने जो कुछ कहा है, उसे शीघ्र पूरा करो। इस विषय में मत सोचो। 33।   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.33 
इन्द्र उवाच
अहमिन्द्रो देवराजस्तक्षन् विदितमस्तु ते।
कुरुष्वैतद् यथोक्तं मे तक्षन् मात्र विचारय॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा- बढ़ई! तुम्हें मालूम होना चाहिए कि मैं देवराज इन्द्र हूँ। मैंने जो कुछ कहा है, उसे शीघ्र पूरा करो। इस विषय में मत सोचो। 33।
 
Indra said- Carpenter! You should know that I am Devraj Indra. Complete whatever I have said quickly. Do not think about this matter. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)