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mahabharat 5.9.28-29: महाराज! वह बढ़ई उसी वन में आया जहाँ त्रिशिरा मारा गया था। भयभीत शचीपति इन्द्र ने उस बढ़ई को वहाँ काम करते देखा। उसे देखते ही पक्षाघात इन्द्र ने तुरन्त उससे कहा - 'बढ़ई! तुम शीघ्रता से इस शव के तीनों सिरों को टुकड़े-टुकड़े कर दो। मेरी आज्ञा का पालन करो'॥ 28-29॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  5.9.28-29 
तदरण्यं महाराज यत्रास्तेऽसौ निपातित:।
स भीतस्तत्र तक्षाणं घटमानं शचीपति:॥ २८॥
अपश्यदब्रवीच्चैनं सत्वरं पाकशासन:।
क्षिप्रं छिन्धि शिरांस्यस्य कुरुष्व वचनं मम॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! वह बढ़ई उसी वन में आया जहाँ त्रिशिरा मारा गया था। भयभीत शचीपति इन्द्र ने उस बढ़ई को वहाँ काम करते देखा। उसे देखते ही पक्षाघात इन्द्र ने तुरन्त उससे कहा - 'बढ़ई! तुम शीघ्रता से इस शव के तीनों सिरों को टुकड़े-टुकड़े कर दो। मेरी आज्ञा का पालन करो'॥ 28-29॥
 
Maharaj! That carpenter came to the same forest where Trishira was killed. Fearful Sachipati Indra saw the carpenter doing his work there. On seeing him, Pakshashan Indra immediately said to him - 'Carpenter! You quickly break the three heads of this corpse into pieces. Follow my command'॥ 28-29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)