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mahabharat 5.9.21-22h: (उसने सोचा-) ​​'आज मैं त्रिशिरा पर वज्र से प्रहार करूँगा, जिससे वह तत्काल नष्ट हो जाएगा। बलवान पुरुष को चाहिए कि अपने शत्रु की उपेक्षा न करे, चाहे वह दुर्बल ही क्यों न हो।'॥21 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.21-22h 
वज्रमस्य क्षिपाम्यद्य स क्षिप्रं न भविष्यति॥ २१॥
शत्रु: प्रवृद्धो नोपेक्ष्यो दुर्बलोऽपि बलीयसा।
 
 
अनुवाद
(उसने सोचा-) ​​'आज मैं त्रिशिरा पर वज्र से प्रहार करूँगा, जिससे वह तत्काल नष्ट हो जाएगा। बलवान पुरुष को चाहिए कि अपने शत्रु की उपेक्षा न करे, चाहे वह दुर्बल ही क्यों न हो।'॥21 1/2॥
 
(He thought-) 'Today I will strike Trishira with a thunderbolt, which will destroy him instantly. A strong man should not ignore his enemy, even if he is weak.'॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)