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mahabharat 5.9.14-15h: हे देव! हम सब अप्सराएँ मिलकर तपस्वी विश्वरूप को मोहित करने जा रही हैं, जो यहाँ बैठे हुए अपने दोनों नेत्रों से सबको जला रहे हैं। वहाँ हम उन्हें वश में करने और आपके भय को दूर करने का भरसक प्रयत्न करेंगी। ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.9.14-15h 
निर्दहन्निव चक्षुर्भ्यां योऽसावास्ते तपोनिधि:।
तं प्रलोभयितुं देव गच्छाम: सहिता वयम्॥ १४॥
यतिष्यामो वशे कर्तुं व्यपनेतुं च ते भयम्।
 
 
अनुवाद
हे देव! हम सब अप्सराएँ मिलकर तपस्वी विश्वरूप को मोहित करने जा रही हैं, जो यहाँ बैठे हुए अपने दोनों नेत्रों से सबको जला रहे हैं। वहाँ हम उन्हें वश में करने और आपके भय को दूर करने का भरसक प्रयत्न करेंगी। ॥14 1/2॥
 
O God! We all Apsaras are going together to entice the ascetic Vishwaroop who is sitting here burning everyone with his two eyes. There we will try our best to control him and remove your fear. ॥ 14 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)