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mahabharat 5.9.13: अप्सराएँ बोलीं - हे शंकर! हे बलनिषूदन! हम विश्वरूप को इस प्रकार मोहित करेंगी कि आपको उनसे कोई भय न रहेगा॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.9.13 
अप्सरस ऊचु:
तथा यत्नं करिष्याम: शक्र तस्य प्रलोभने।
यथा नावाप्स्यसि भयं तस्माद् बलनिषूदन॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अप्सराएँ बोलीं - हे शंकर! हे बलनिषूदन! हम विश्वरूप को इस प्रकार मोहित करेंगी कि आपको उनसे कोई भय न रहेगा॥13॥
 
The Apsaras said - O Shankara! O Balanishudana! We will try to entice Vishwaroop in such a way that you will not have any fear from him.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)