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mahabharat 5.9.10: हे अप्सराओं! जैसे त्रिशिरा विषय-भोगों में अत्यन्त मोहित हो जाता है, वैसे ही शीघ्रता से वैसा ही करने का प्रयत्न करो। जाओ, उसे मोहित करो, विलम्ब मत करो॥10॥   |   mahabharat अध्याय 5.9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 9: इन्द्रके द्वारा त्रिशिराका वध, वृत्रासुरकी उत्पत्ति, उसके साथ इन्द्रका युद्ध तथा देवताओंकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.9.10 
यथा स सज्जेत् त्रिशिरा: कामभोगेषु वै भृशम्।
क्षिप्रं कुरुत गच्छध्वं प्रलोभयत मा चिरम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे अप्सराओं! जैसे त्रिशिरा विषय-भोगों में अत्यन्त मोहित हो जाता है, वैसे ही शीघ्रता से वैसा ही करने का प्रयत्न करो। जाओ, उसे मोहित करो, विलम्ब मत करो॥10॥
 
‘O Apsaras! Just as Trishira becomes extremely enamoured with sensual pleasures, try to do the same quickly. Go, entice him, do not delay.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)