Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.89.26-27: विदुरजी बुद्धिमानों में श्रेष्ठ थे। सब कुछ प्रत्यक्ष देखने वाले श्रीकृष्ण ने सदा धर्म में तत्पर रहने वाले, क्रोधरहित, प्रेममय, दयालु और बुद्धिमान विदुर को पाण्डवों के समस्त प्रयत्नों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। 26-27॥ | mahabharat अध्याय 5.89: श्रीकृष्णका स्वागत, धृतराष्ट्र तथा विदुरके घरोंपर उनका आतिथ्य । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विदुरजी बुद्धिमानों में श्रेष्ठ थे। सब कुछ प्रत्यक्ष देखने वाले श्रीकृष्ण ने सदा धर्म में तत्पर रहने वाले, क्रोधरहित, प्रेममय, दयालु और बुद्धिमान विदुर को पाण्डवों के समस्त प्रयत्नों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। 26-27॥
Vidurji was the best among the wise. Shri Krishna, who sees everything directly, narrated in detail all the efforts of the Pandavas to Vidur, who is always committed to the Dharma, is anger-free loving, kind-hearted and intelligent. 26-27॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि धृतराष्ट्रगृहप्रवेशपूर्वकं श्रीकृष्णस्य विदुरगृहप्रवेशे एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रगृहमें प्रवेशपूर्वक विदुरके गृहमें पदार्पणविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥