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mahabharat 5.89.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! प्रातःकाल उठकर (वहाँ वृकस्थल में) भगवान श्रीकृष्ण ने अपने समस्त नित्य कर्म समाप्त किए। फिर ब्राह्मणों की अनुमति लेकर वे हस्तिनापुर की ओर चल पड़े। 1.   |   mahabharat अध्याय 5.89: श्रीकृष्णका स्वागत, धृतराष्ट्र तथा विदुरके घरोंपर उनका आतिथ्य   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 89: श्रीकृष्णका स्वागत, धृतराष्ट्र तथा विदुरके घरोंपर उनका आतिथ्य  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.89.1 
वैशम्पायन उवाच
प्रातरुत्थाय कृष्णस्तु कृतवान् सर्वमाह्निकम्।
ब्राह्मणैरभ्यनुज्ञात: प्रययौ नगरं प्रति॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! प्रातःकाल उठकर (वहाँ वृकस्थल में) भगवान श्रीकृष्ण ने अपने समस्त नित्य कर्म समाप्त किए। फिर ब्राह्मणों की अनुमति लेकर वे हस्तिनापुर की ओर चल पड़े। 1.
 
Vaishampayana says - Janamejaya! After getting up in the morning (there in Vrikasthal), Lord Krishna completed all his daily chores. Then taking the permission of the Brahmins, he proceeded towards Hastinapur. 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)