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mahabharat 5.88.8: हे राजन! कोई श्रीकृष्ण का आदर करे या न करे, इससे वे क्रोधित नहीं होंगे। किन्तु वे कभी भी उपेक्षा के योग्य नहीं हैं, इसलिए कोई भी उनका अपमान या अवहेलना नहीं कर सकता।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.88.8 
सत्कृतोऽसत्कृतो वापि न क्रुद्धॺेत जनार्दन:।
नालमेनमवज्ञातुं नावज्ञेयो हि केशव:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! कोई श्रीकृष्ण का आदर करे या न करे, इससे वे क्रोधित नहीं होंगे। किन्तु वे कभी भी उपेक्षा के योग्य नहीं हैं, इसलिए कोई भी उनका अपमान या अवहेलना नहीं कर सकता।॥8॥
 
O King! Whether someone honours Shri Krishna or not, this will not anger him. But he is never worthy of being ignored; therefore, no one can insult or disregard him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)