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श्लोक  5.88.7 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा भीष्म: कुरुपितामह:।
वैचित्रवीर्यं राजानमिदं वचनमब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! दुर्योधन की यह बात सुनकर कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म ने विचित्रवीर्यपुत्र राजा धृतराष्ट्र से इस प्रकार कहा:
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Duryodhana, the aged grandfather of the Kuru clan, Bhishma, spoke to King Dhritarashtra, the son of Vichitravirya, in the following manner:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)