Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.88.3: मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि श्रीकृष्ण उन वस्तुओं के योग्य नहीं हैं; अपितु मैं उन्हें अस्वीकार इसलिए कर रहा हूँ कि वर्तमान समय और स्थान उन्हें विशेष सम्मान देने के लिए उपयुक्त नहीं है। राजन! इस समय श्रीकृष्ण यह समझेंगे कि वे भय के कारण मेरी पूजा कर रहे हैं।॥3॥ | mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देश: कालस्तथायुक्तो न हि नार्हति केशव:।
मंस्यत्यधोक्षजो राजन् भयादर्चति मामिति॥ ३॥
अनुवाद
मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूँ कि श्रीकृष्ण उन वस्तुओं के योग्य नहीं हैं; अपितु मैं उन्हें अस्वीकार इसलिए कर रहा हूँ कि वर्तमान समय और स्थान उन्हें विशेष सम्मान देने के लिए उपयुक्त नहीं है। राजन! इस समय श्रीकृष्ण यह समझेंगे कि वे भय के कारण मेरी पूजा कर रहे हैं।॥3॥
I am not saying this because Sri Krishna does not deserve those things; rather I am refusing them because the present time and place is not suitable for giving him special respect. King! At this time Sri Krishna will think that he is worshipping me out of fear. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥