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mahabharat 5.88.23: ऐसा कहकर भरतश्रेष्ठ और सत्यवादी वृद्ध पितामह भीष्म अत्यन्त क्रोधित होकर सभाभवन से उठकर चले गए॥23॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.88.23 
इत्युक्त्वा भरतश्रेष्ठो वृद्ध: परममन्युमान्।
उत्थाय तस्मात् प्रातिष्ठद् भीष्म: सत्यपराक्रम:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भरतश्रेष्ठ और सत्यवादी वृद्ध पितामह भीष्म अत्यन्त क्रोधित होकर सभाभवन से उठकर चले गए॥23॥
 
Saying this, Bharat's best and truthful old grandfather Bhishma got very angry and got up from the meeting hall and went away. 23॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि दुर्योधनवाक्ये अष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें दुर्योधनवाक्यविषयक अट्ठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)