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mahabharat 5.88.22: इसने धर्म को सर्वथा त्याग दिया है। अब मैं इस दुष्टबुद्धि, पापी और क्रूर दुर्योधन के बुरे वचन किसी भी प्रकार सुनना नहीं चाहता ॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.88.22 
पापस्यास्य नृशंसस्य त्यक्तधर्मस्य दुर्मते:।
नोत्सहेऽनर्थसंयुक्ता: श्रोतुं वाच: कथंचन॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इसने धर्म को सर्वथा त्याग दिया है। अब मैं इस दुष्टबुद्धि, पापी और क्रूर दुर्योधन के बुरे वचन किसी भी प्रकार सुनना नहीं चाहता ॥ 22॥
 
He has completely abandoned Dharma. Now I do not wish to listen to the evil words of this evil-minded, sinful and cruel Duryodhana in any way. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)