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mahabharat 5.88.20: तू भी अपने सम्बन्धियों की बातें न मानकर इस कुमार्ग पर चलने वाले पापी जीव का अनुसरण कर ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.88.20 
इममुत्पथि वर्तन्तं पापं पापानुबन्धिनम्।
वाक्यानि सुहृदां हित्वा त्वमप्यस्यानुवर्तसे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तू भी अपने सम्बन्धियों की बातें न मानकर इस कुमार्ग पर चलने वाले पापी जीव का अनुसरण कर ॥20॥
 
You too do not listen to the words of your relatives and follow this sinful soul who is on the wrong path. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)