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mahabharat 5.88.16: वैशम्पायन जी कहते हैं - हे राजन! दुर्योधन के भगवान श्रीकृष्ण के प्रति छल-कपट के विषय में कहे गए भयंकर वचन सुनकर धृतराष्ट्र अपने मन्त्रियों सहित अत्यन्त दुःखी और निराश हो गए।   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.88.16 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा घोरं कृष्णाभिसंहितम्।
धृतराष्ट्र: सहामात्यो व्यथितो विमनाभवत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन जी कहते हैं - हे राजन! दुर्योधन के भगवान श्रीकृष्ण के प्रति छल-कपट के विषय में कहे गए भयंकर वचन सुनकर धृतराष्ट्र अपने मन्त्रियों सहित अत्यन्त दुःखी और निराश हो गए।
 
Vaishmpayana says: O King! On hearing Duryodhan's terrible words about deceit against Lord Krishna, Dhritarashtra, along with his ministers, became very sad and dejected.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)