Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.88.12: दुर्योधन ने कहा - पितामह! हे मनुष्यों! अब यह सम्भावना नहीं है कि मैं जीवन भर पाण्डवों के साथ इस समस्त धन का उपभोग कर सकूँ॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दुर्योधन ने कहा - पितामह! हे मनुष्यों! अब यह सम्भावना नहीं है कि मैं जीवन भर पाण्डवों के साथ इस समस्त धन का उपभोग कर सकूँ॥ 12॥
Duryodhan said - Grandfather! O lord of men! Now there is no possibility that I will be able to enjoy all this wealth with the Pandavas throughout my life.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥