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mahabharat 5.88.11: धर्मात्मा भगवान श्रीकृष्ण जो कुछ कहेंगे, वह अवश्य ही धर्म और अर्थ के अनुकूल होगा। इसलिए अपने स्वजनों से मधुर वचन ही बोलना चाहिए। 11॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.88.11 
धर्म्यमर्थ्यं च धर्मात्मा ध्रुवं वक्ता जनार्दन:।
तस्मिन् वाच्या: प्रिया वाचो भवता बान्धवै: सह॥ ११॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा भगवान श्रीकृष्ण जो कुछ कहेंगे, वह अवश्य ही धर्म और अर्थ के अनुकूल होगा। इसलिए अपने स्वजनों से मधुर वचन ही बोलना चाहिए। 11॥
 
Whatever the righteous Lord Shri Krishna will say will definitely be in accordance with religion and meaning. Therefore, you should speak only kind words to your relatives. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)