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mahabharat 5.88.10: अतः महाबाहु श्रीकृष्ण जो कुछ कहें, उसे बिना किसी संदेह के करना चाहिए। वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण को मध्यस्थ बनाकर शीघ्र ही पाण्डवों के साथ संधि कर लो। 10॥   |   mahabharat अध्याय 5.88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 88: दुर्योधनका श्रीकृष्णके विषयमें अपने विचार कहना एवं उसकी कुमन्त्रणासे कुपित हो भीष्मजीका सभासे उठ जाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.88.10 
स यद् ब्रूयान्महाबाहुस्तत् कार्यमविशङ्कया।
वासुदेवेन तीर्थेन क्षिप्रं संशाम्य पाण्डवै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अतः महाबाहु श्रीकृष्ण जो कुछ कहें, उसे बिना किसी संदेह के करना चाहिए। वसुदेवनन्दन श्रीकृष्ण को मध्यस्थ बनाकर शीघ्र ही पाण्डवों के साथ संधि कर लो। 10॥
 
Therefore, whatever Mahabahu Shri Krishna says, it should be done without any doubt. Make a treaty with the Pandavas quickly by appointing Vasudevanandan Shri Krishna as your mediator. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)