श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 87: विदुरका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी आज्ञाका पालन करनेके लिये समझाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.87.8 
मायैषा सत्यमेवैतच्छद्मैतद् भूरिदक्षिण।
जानामि त्वन्मतं राजन् गूढं बाह्येन कर्मणा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज, यज्ञों में बहुत-सी दक्षिणा देने वाले, मैं सत्य कह रहा हूँ। यह सब आपकी माया और छल है। मैं आपके इन बाह्य व्यवहारों के पीछे छिपे आपके वास्तविक अभिप्राय को समझ रहा हूँ।॥8॥
 
O Maharaja, who gives a lot of Dakshina in Yagyas, I am telling the truth. All this is just your Maya and deception. I understand your real intention which is hidden behind these external behaviors of yours. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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