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mahabharat 5.87.4: भूपाल! आपके सद्गुण इस संसार में सदैव उन्नति और प्रतिष्ठा लाने वाले हैं। अतः आपको अपने स्वजनों सहित इन सद्गुणों की रक्षा करने का सदैव प्रयत्न करना चाहिए। 4॥   |   mahabharat अध्याय 5.87: विदुरका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी आज्ञाका पालन करनेके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 87: विदुरका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी आज्ञाका पालन करनेके लिये समझाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.87.4 
सदैव भावितो लोको गुणौघैस्तव पार्थिव।
गुणानां रक्षणे नित्यं प्रयतस्व सबान्धव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भूपाल! आपके सद्गुण इस संसार में सदैव उन्नति और प्रतिष्ठा लाने वाले हैं। अतः आपको अपने स्वजनों सहित इन सद्गुणों की रक्षा करने का सदैव प्रयत्न करना चाहिए। 4॥
 
Bhupal! Your set of virtues is always bringing progress and prestige to this world. Therefore, you along with your relatives should always try to protect these virtues. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)