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mahabharat 5.87.17: महाराज! आप पिता हैं और पाण्डव आपके पुत्र हैं। आप वृद्ध हैं और वे बालक हैं। आपको उनके साथ पिता के समान स्नेहपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। वे सदैव आपके प्रति पुत्रों के समान भक्ति और आदर रखते हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.87: विदुरका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी आज्ञाका पालन करनेके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 87: विदुरका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्णकी आज्ञाका पालन करनेके लिये समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.87.17 
पितासि राजन् पुत्रास्ते वृद्धस्त्वं शिशव: परे।
वर्तस्व पितृवत् तेषु वर्तन्ते ते हि पुत्रवत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप पिता हैं और पाण्डव आपके पुत्र हैं। आप वृद्ध हैं और वे बालक हैं। आपको उनके साथ पिता के समान स्नेहपूर्ण व्यवहार करना चाहिए। वे सदैव आपके प्रति पुत्रों के समान भक्ति और आदर रखते हैं॥17॥
 
Maharaj! You are a father and the Pandavas are your sons. You are old and they are children. You should treat them with affection like a father. They always have devotion and respect for you like sons.॥ 17॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि विदुरवाक्ये सप्ताशीतितमोऽध्याय:॥ ८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें विदुरवाक्यविषयक सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)