Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.86.9: मेरे पास भेड़ की ऊन से बने असंख्य कम्बल हैं, जो मुझे पहाड़ी लोगों से उपहार स्वरूप मिले थे, जो स्पर्श करने पर बहुत मुलायम लगते हैं; मैं उनमें से अठारह हजार कम्बल श्री कृष्ण को भेंट करूंगा। | mahabharat अध्याय 5.86: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आविकं च सुखस्पर्शं पार्वतीयैरुपाहृतम्।
तदप्यस्मै प्रदास्यामि सहस्राणि दशाष्ट च॥ ९॥
अनुवाद
मेरे पास भेड़ की ऊन से बने असंख्य कम्बल हैं, जो मुझे पहाड़ी लोगों से उपहार स्वरूप मिले थे, जो स्पर्श करने पर बहुत मुलायम लगते हैं; मैं उनमें से अठारह हजार कम्बल श्री कृष्ण को भेंट करूंगा।
I have innumerable blankets made of sheep wool, which I received as a gift from the mountain people, which feel very soft to the touch; I will gift eighteen thousand of those blankets to Shri Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥