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mahabharat 5.86.8: इसके साथ ही मैं उसे स्वर्ण-कान्ति वाली सौ अत्यंत सुन्दर दासियाँ दूँगा, जिन्होंने कोई संतान उत्पन्न नहीं की है। मैं उसे दासियों की संख्या के बराबर दास भी दूँगा।   |   mahabharat अध्याय 5.86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.86.8 
दासीनामप्रजातानां शुभानां रुक्मवर्चसाम्।
शतमस्मै प्रदास्यामि दासानामपि तावताम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही मैं उसे स्वर्ण-कान्ति वाली सौ अत्यंत सुन्दर दासियाँ दूँगा, जिन्होंने कोई संतान उत्पन्न नहीं की है। मैं उसे दासियों की संख्या के बराबर दास भी दूँगा।
 
Along with this I will give him a hundred extremely beautiful maids with golden lustre who have not given birth to any child. I will also give him slaves equal to the number of maids.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)