Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.86.21: मेरे और दुर्योधन के पास जितने भी रत्न हैं, वे सब इसी घर में रखे हैं। भगवान कृष्ण उनसे जो भी रत्न चाहें, वे बिना किसी संदेह के उन्हें दे दिए जाएँ। | mahabharat अध्याय 5.86: धृतराष्ट्रका भगवान् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे और दुर्योधन के पास जितने भी रत्न हैं, वे सब इसी घर में रखे हैं। भगवान कृष्ण उनसे जो भी रत्न चाहें, वे बिना किसी संदेह के उन्हें दे दिए जाएँ।
All the gems that I and Duryodhan have are kept in this house. Whatever gems Lord Krishna wants from them, they should be given to him without any doubt.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि धृतराष्ट्रवाक्ये षडशीतितमोऽध्याय:॥ ८६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें धृतराष्ट्रवाक्यविषयक छियासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥