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mahabharat 5.86.20: यह महल सुन्दर आकार के भवनों से सुशोभित है, शुभ है, सुखदायक है, सभी ऋतुओं की शोभा से युक्त है और अनन्त धन से समृद्ध है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.86.20 
एतद्धि रुचिराकारै: प्रासादैरुपशोभितम्।
शिवं च रमणीयं च सर्वर्तुसुमहाधनम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह महल सुन्दर आकार के भवनों से सुशोभित है, शुभ है, सुखदायक है, सभी ऋतुओं की शोभा से युक्त है और अनन्त धन से समृद्ध है ॥20॥
 
This palace is adorned with beautifully shaped buildings, is auspicious, pleasant, has the splendor of all the seasons and is rich with infinite wealth. ॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)