श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 86: धृतराष्ट्रका भगवान‍् श्रीकृष्णकी अगवानी करके उन्हें भेंट देने एवं दु:शासनके महलमें ठहरानेका विचार प्रकट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.86.19 
दु:शासनस्य च गृहं दुर्योधनगृहाद् वरम्।
तदद्य क्रियतां क्षिप्रं सुसम्मृष्टमलंकृतम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यह कहकर उन्होंने फिर कहा- दु:शासन का महल दुर्योधन के महल से भी अच्छा है। आज उसे सब प्रकार से साफ करके सजा देना चाहिए॥19॥
 
Having said this, he again said- Dushasan's palace is better than Duryodhan's palace. Today it should be cleaned and decorated in every way.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)